अमीतो बाबा

ठहरिए। देखिए। स्वयं को जानिए।

थोड़ा रुकिए। अपने देखने को देखिए। शायद इसी ठहराव में अपने आप से मिलने की शुरुआत हो।

आज का विचार

आज
आप दुनिया को जैसा देखते हैं,वह दुनिया से अधिक आपके भीतर का परिचय होता है।दूसरों को देखने के साथ स्वयं को भी देखिए।

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ठहरिए

ठहरिए

आसक्ति, विरक्ति और अनासक्ति

आध्यात्मिक व्यक्ति वह नहीं है जो संसार से विरक्त रहता है, आध्यात्मिक व्यक्ति वह है जो संसार से आसक्त नहीं रहता।लेकिन विरक्ति और अनासक्ति में अंतर क्या है?विरक्ति का अर्थ है— “मुझे…

खरी खरी

खरी खरी

श्रेष्ठता और हीनता — एक ही सिक्के के दो पहलू

आपको लगता है कि आप दूसरों से बेहतर हैं? या आपको लगता है कि दूसरे आपसे बेहतर हैं? दोनों ही स्थितियों में आप अभी भी दूसरों के अधीन हैं। क्यों? क्योंकि आपने अपने मूल्य का पैमाना अपने हाथ में रखा ही नहीं। आपने किसी दूसरे को अपना पैमाना बना लिया।

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अमीतो बाबा से एक सवाल

जो बात मन में है, उसे पूछिए। शायद सवाल ही किसी नई समझ का दरवाज़ा हो।

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अमीतो बाबा के बारे में

आत्मचिंतन, मन और जीवन को थोड़ा अलग ढंग से देखने की एक यात्रा।

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