आसक्ति, विरक्ति और अनासक्ति
आध्यात्मिक व्यक्ति वह नहीं है जो संसार से विरक्त रहता है, आध्यात्मिक व्यक्ति वह है जो संसार से आसक्त नहीं रहता।लेकिन विरक्ति और अनासक्ति में अंतर क्या है?विरक्ति का अर्थ है— “मुझे…
थोड़ा रुकिए। अपने देखने को देखिए। शायद इसी ठहराव में अपने आप से मिलने की शुरुआत हो।
आध्यात्मिक व्यक्ति वह नहीं है जो संसार से विरक्त रहता है, आध्यात्मिक व्यक्ति वह है जो संसार से आसक्त नहीं रहता।लेकिन विरक्ति और अनासक्ति में अंतर क्या है?विरक्ति का अर्थ है— “मुझे…
आपको लगता है कि आप दूसरों से बेहतर हैं? या आपको लगता है कि दूसरे आपसे बेहतर हैं? दोनों ही स्थितियों में आप अभी भी दूसरों के अधीन हैं। क्यों? क्योंकि आपने अपने मूल्य का पैमाना अपने हाथ में रखा ही नहीं। आपने किसी दूसरे को अपना पैमाना बना लिया।
आध्यात्मिक व्यक्ति वह नहीं है जो संसार से विरक्त रहता है, आध्यात्मिक व्यक्ति वह है जो संसार से आसक्त नहीं रहता।लेकिन विरक्ति और अनासक्ति में अंतर क्या है?विरक्ति का अर्थ है— “मुझे…
आपको लगता है कि आप दूसरों से बेहतर हैं? या आपको लगता है कि दूसरे आपसे बेहतर हैं? दोनों ही स्थितियों में आप अभी भी दूसरों के अधीन हैं। क्यों? क्योंकि आपने अपने मूल्य का पैमाना अपने हाथ में रखा ही नहीं। आपने किसी दूसरे को अपना पैमाना बना लिया।
जो बात मन में है, उसे पूछिए। शायद सवाल ही किसी नई समझ का दरवाज़ा हो।
अपना सवाल पूछेंआत्मचिंतन, मन और जीवन को थोड़ा अलग ढंग से देखने की एक यात्रा।